آپ جانا اُدھر،اورآپ ہی حیراں ہونا وائے دِیوانگیِ شوق کہ ہردم مُجھ کو

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وائے   دِیوانگیِ شوق   کہ ہردم مُجھ  کو
آپ جانا  اُدھر، اورآپ ہی حیراں ہونا
      ہردم=ہر  سانس  پر،  ہر  گھڑی   وائے=  افسوس     از  بسکہ=بہت  زیادہ   دیوانگیِ  شوق=    جنونِ  عشق       اُدھر =  معشوق  کی  طرف

    تشریح:   مُجھے  اپنے  عشق  کے  دیوانہ پن  پر  افسوس  آتا  ہے  کہ  اس  کے  تقاضے  سے  مَیں  باربار  تیری  طرف  جاتا  ہوں  اور  پھر  آپ  ہی  آپ  حیران  و  پریشان  ہوں  کہ  میں یہاں  کیوں  آیا ،  تُجھ  تک  رسائی  تو  مُمکن  ہی  نہیں۔  یعنی   یہ  عشق  کا  جنون  تھا کہ  تیرے  کوچے   میں  ہزاربار  آئے   اور  ہزاربار  ناکام  لوٹ  آئے۔ 

شعر کی خوبیاں:   دیدار  کی  تمنّا   میں  معشوق  کی  گلی  کے  چکّر  لگانا    غالِبؔ  نے  عجب  انداز  میں   بیان  کیا  ہے۔  وہ  بیان  کرتا  ہے کہ  کس  طرح   وہ  معشوق  کے  ملنے  کے  خواب  اور  یہ حقیقت  کہ  اِس  کا  مِلنا  نا مُمکن  ہے،  میں  گھِرا  ہوا  ہے۔     اُسکی   بیچارگی  ہمارے  دِلوں  کو  چھو  جاتی  ہے۔  موجودہ  زمانہ  میں  کئیں  مدّاح  اپنے  چہیتے  اداکاروںHero-Heroin کی  جھلک  پانے  کے  لئے  ان  کی  گلی  کے  چکّر  لگاتے  ہیں  اور  ناکامیاب  لوٹ  آتے  ہیں۔  یہfansبھی  دیوانگیِ  شوق  میں  ہردم  اُدھر  جاتے  ہیں  اور  حیران   لوٹ  آتے  ہیں۔   اِس  شعر  میں  غالِبؔ  نے ہر  دم  لفظ  اِستعمال  کیا  ہے۔  اس کا مطلب  ہر گھڑی  ہوتا  ہے  اور  ہر  سانس  بھی  ہوتا  ہے۔  اگر  ہم   ہر  دم کو  ہر  سانس کا  مفہوم  سمجھے  تو  شعر  عِشقِ  حقیقی  کے  دائرہِ  میں چلا  جاتا  ہے،  جو  حسبِ  ذیل  ہے۔

ماہرینِ  غالِبؔ  کی  رائے:

طباؔطبائی:  یعنی  ہر  سانس  لینے  سے  مَیں  اس  مبداء  حیات  و  وجود  کی  طرف  دوڑتا  ہوں  اور  اپنی  نارسائی  سے  حیران  ہوکر  رہ  جاتا  ہوں۔

 بیخودؔ:  بار بار  معشوقِ  حقیقی  کا  مُشتاقِ  جمال  ہوکر  اپنی  خودی  سے  گُزر جاتا  ہوں  اور  نارسائی  کی  وجہ  سے  حیران  ہوکر  سوچتا  رہ  جاتا  ہوں  کہ  میں  کہاں  اور  اس  کا  دیدار  کہاں؟

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