उसे कौन देख सकता के, यगाना है वो यकता जो दूई की बू भी होती, तो कहीं दो-चार होता

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उसे कौन देख सकता के, यगाना है वो यकता
जो दूई की बू भी होती, तो कहीं दो-चार होता
गाना है वो यकता = ख़ुदाए वाहिद-ओ-बेमिसाल;   दुई की बू = दुई का नाज़ुक फ़र्क़;   दो-चार होता = दिखाई देता

अर्थ:इस शेअर में ग़ालिब ख़ुदा किया है, इस के बारे में अपने ख़्याल का इज़हार किया है। क़ुरान में कईं जगहों पर ख़ुदा की वेहदत के बारे में ज़िक्र आया है। ग़ालिब कहता है ख़ुदा बेमिसाल है। वो वाहिद है। यगाना है। इस लिए उसे कोई नहीं देख सकता। अगर इस में ज़रा सी दुइ होती तो कहीं ना कहीं वो ज़रूर दिखाई देता 

माहिरीन-ए- ग़ालिब की राय: सहा और सय्यद की राय :-

आसी की राय:- क़ुरान कहता हे के अगर आसमान-ज़मीन मे सिवाए ख़ुदाके चंद ख़ुदा होते तो ज़रूर फ़साद होता। चूँकि तबीयतें या इख़्तयारात मुजतमा नहीं हो सकतीं। अगर वो सुलह करने की कोशिश करें तो सुलह नहीं होसकती क्योंकि सुलह बराबर वालों में नहीं हो सकती एक ग़ालिब होगा तो दूसरा मग़्लूब होगा। जो मग़्लूब होगा वो ख़ुदा नहीं।

 

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