शौक़ हर रंग रक़ीब-ए-सर-ओ-सामां निकला केस तस्वीर के पर्दे में भी उरयां निकला

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शौक़ हर रंग रक़ीबसरसामां निकला
केस  तस्वीर  के  पर्दे  में भी उरयां निकला
शौक़=इश्क़   हर रंग =हरतरह in every aspect        रक़ीब=दुश्मन        केस=मजनूं का अस्ली नाम      सरोसामां =तकल्लुफ़ात,  NICETY        आराइश =decoration 

तशरीह: इश्क़ सिर्फ़ इश्क़ के लिए है उसे रोटी कपड़ा मकान या कोइ और दुनयवी आराइश दरकार नहीं। मजनू ने दुनिया के हर ऐश-ओ-आराइश को छोड दिया था । इश्क़ जिस रंग में भी हो, वो आराइश और साज़-ओ-सामां का दुश्मन है। मजनू की तस्वीर देखिए। इस को इश्क़ था इस लिए इस की तस्वीर हमेशा बग़ैर कपड़ों में (नंगी) ही खींची जाती है।

माहरीनं ग़ालिब की राय:

बेख़ूद की राय: इश्क़ का रंग ऐसा साबित हुआ है कि क़ेस को तस्वीर के लिबास में भी उरयां रखा। रंग-ए-तस्वीर भी केस की उरयानी(नंगे पन) का पर्दा ना बन सका। हर रंग के मानी है इश्क़ में, दीवानगी में, उरयानी (नंगे पन) में, तस्वीर के रंग में, यानी कि हर रंग में इश्क़ नेक नामी और इज़्ज़त का दुश्मन ही रहा है। और ग़ालिब ने भी उसे उरयां ही दिखाया है। तबा तबाई की राय: हर रंग मुहावरा नहीं है। हर तरह होना चाहीए था। तनासुब लफ़्ज़ी(अलफ़ाज़ की सजावट) के लिए मुहावरा छोड देना मुनासिब नहीं। ,

शेअर की खूबियां: उर्दू शायरी में मजनूं आशिकों में अव्वल है। वो इश्क़ का ख़ुदा है। उर्दू शायर मजनू के हर काम को और हर हरकत को सरहाते हैं जिस तरह शागिर्द और चेले अपने पीर या गुरू को सरहाते हैं। इश्क़ सिर्फ़ इश्क़ के लिए है उसे रोटी ,कपड़ा, मकान, या को ऐ और दुनयवी आराइश दरकार नहीं। मजनूं ने दुनिया के हर ऐश-ओ-आराइश को छोड दिया था। जब एक पेंटर मजनूं की तस्वीर बनाता है तो उसे नंगी ही बनाना पड़ता है क्योंकि मजनूं कपड़ों को फाड़ कर नंगा हो जाता था। ग़ालिब कहता है कि पेंटर या मुसव्विर का paint और केनवास भी मजनूं को cover नहीं कर सकते। हालांकि रंग और केनवास दोनों ख़राब चीजों को ढांक सकते हैं। एक पेंटर, एक जोगी की तस्वीर कपड़े पहने नहीं बना सकता उसे नंगा और भभूत रमाये हुए ही बताना पड़ता है। शेअर के अलफ़ाज़ की सजावट बहुत खूब है।

https://www.youtube.com/watch?v=4ZXp968YB5A Film: Mirza Ghalib. Music: Jaidev. Singer: Asha Bhosle

https://www.youtube.com/watch?v=4Tqt8p_BtUM Singer: Ghulam Ali

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