जलवा अज़ बसके तक़ाज़ाए निगह करता है जौहर-ए-आएना भी, चाहे है मिझ़गां होना

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जलवा अज़ बसके तक़ाज़ाए निगह करता है
जौहर-ए-आएना  भी, चाहे है मिझ़गां  होना
जलवा= हुस्न-ए-यार तक़ाज़ानिगह=झलक देखने की ज़िद   जौहर-ए-आएना = वो ख़तूत जो आएना में सैक़ल करे वक़्त पड़ जाते हैं। पहले ज़माना में जब आएनों को बजाए मशीन, हाथ से पॉलिश किया जाता था और पीछे की तरफ़ क़लई भी हाथ से की जाती थी और आएनों में ख़त (scratches) रह जाते थे। ग़ालिब उसे जौहर-ए-आएना कहता है। ग़ालिब की मुराद आएनह-ए- फ़ौलादी से भी हो सकती है।

तशरीह:माशूक़ का जलवा-ए-हुस्न बहुत ज़्यादा है। येह जलवा हर शय से तक़ाज़ा करता है कि उसे देखा जाए। इस के हुक्म की तामील में आईना तो आंख बनकर इस जलवे को देख ही रहा है, आईना में पड़े हुए बाल, खुतूत, या scratches भी पलकें बन जाना चाहते हैं। इस शेअर में ग़ालिब ने आएइने को आंख और इस के जौहर को मिझ़गां से तशबेआ दी है।माहिरीन-ए- ग़ालिब की राय: सहा और सय्यद की राय :- मिझ़गां होना से आंख बनना मुराद है यानी जौहर-ए-आएना शौक-ए-तमाशा में ये चाहता है कि मिझ़गां (आंख) बन जाए।

आसी की राय:-चूकिं इस का जलवा हर एक से तक़ाज़ाए निगह करता है, जब आएना में इस का अक्स पड़ा तो इस के जौहर में ये खासियत पैदा हो गई कि वो मिझ़गानी करने लगा, यह उस के जलवा-ए- के असर से मिझ़गान बन गया। शेअर की खूबियां: एक बहुत है नाज़ुक मज़मून है । ग़ालिब के अंदाज़-ए- बयान पर दिल आफरीन आफरीन पुकारता है

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