इश्क़ से, तबीयत ने, ज़ीस्त का मज़ा पाया

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इश्क़से, तबीयतने, ज़ीस्तका मज़ा पाया
 दर्द  की   दवा  पाई,  दर्दबे  दवा   पाया
दर्द की दवा= दर्द-ए-ज़िंदगी की दवा   दर्द-ए- बे दवा = इश्क़

तशरीह: शायर का ख़्याल है कि ज़िंदगी बग़ैर इश्क़ के बद मज़ा और बेकार है । अगर इश्क़ ना हो तो ज़िंदगी एक दर्द-ए- सर है। कहते हैं जब इश्क़ का मर्ज़ लगा तो ज़िंदगी में लुत्फ़ आया क्योंकि ग़म-ए-इश्क़ में ग़म-ए-दुनिया को भूल गए। गोया हमें दर्द-ए-ज़िन्दगी की दवा मिल गई। मगर ये दवा ऐसी कि जिस का कोई उतार नहीं यानी इश्क़ दर्द-ए-बे दवा है।

शेअर की खूबियां: शेअर छोटी बहर (meter) में है और अलफ़ाज़ आसान और सलीस हैं । शेअर के दोनों मिसरों में पाया लफ्ज़ है इस लिए वोह मिसरा-ए-सानी या दूसरा मिसरा कहलाए गा। शेअर इशक़ खा गेहराइयों को बयान करता हे.۔ 

جاپان   میں  سوموکُشتی  باز  اپنا  وزن  ازحد  بڑہا  دیتے  ہیں اوراس  وجہ سے  وہ  دِلکی  اور  دوسری  کئیں  بیماریوں  کا  شکار  ہوتے  ہیں  اورکم عمر  میں  مرجاتے  ہیں۔لیکن  وہ اپنی  ایسی  زندگی کوچاہتے  ہیں۔  یہ  ان  کا  کُشتی  کرنے  کا  عشق  ہے۔  اسی طرح  ایک  عاشق  اپنےہر  زخم سےمحبت کرتا  ہے۔  غالِبؔ  کہتا  ہے  اسکی  زندگی  کا  مقصدہی عشق کےزخموں  کی  ایزا  دوستی  ہے۔  یعنی  بغیر عشق کےزندگی بےمعنی  اور   بور  کرنے  والی  ہو جاتی  ہے۔عشق  زندگی  دوسرےغموں کو بھلا  دیتا  ہےاور  زندگی کوجینے  ایک مقصد  عطا  کرتا  ہے۔

اگرعشقِ  حقیقی  کےنظریہِ سےشعرکو  دیکھیں تو ایک   الگ مطلب  پیدا  کرتا  ہے۔منصورؔ  اورمیراؔ     اور  گردھرؔ  کےعشق  میں گرفتارتھے ۔منصورہنستےہنستےپھانسی چڑھ گئے  اور  میرؔا  زہر  پی گئی۔

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